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मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा अत-तूर पढ़ते सुना। जब आप इस आयत पर पहुँचे : (أم خُلِقُوا…
मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा अत-तूर पढ़ते सुना। जब आप इस आयत पर पहुँचे : (أم خُلِقُوا من غير شيء أم هم الخالقون، أم خَلَقُوا السموات والأرض بل لا يوقنون، أم عندهم خزائن ربك أم هم المسيطرون) (क्या वे बिना किसी के पैदा किए ही पैदा हो गए हैं या वे स्वयं पैदा करने वाले हैं? या उन्होंने ही उत्पत्ति की है आकाशों तथा धरती की? वास्तव में वे विश्वास ही नहीं रखते। या उनके पास आपके पालनहार के कोषागार हैं या वही उसके अधिकारी हैं?) तो ऐसा लग रहा था कि मेरा दिल उड़ जाएगा।
जुबैर बिन मुतइम (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को मग़रिब की नमाज़ में सूरा अत-तूर पढ़ते सुना। जब आप इस आयत पर पहुँचे : (أم خُلِقُوا من غير شيء أم هم الخالقون، أم خَلَقُوا السموات والأرض بل لا يوقنون، أم عندهم خزائن ربك أم هم المسيطرون) (क्या वे बिना किसी के पैदा किए ही पैदा हो गए हैं या वे स्वयं पैदा करने वाले हैं? या उन्होंने ही उत्पत्ति की है आकाशों तथा धरती की? वास्तव में वे विश्वास ही नहीं रखते। या उनके पास आपके पालनहार के कोषागार हैं या वही उसके अधिकारी हैं?) तो ऐसा लग रहा था कि मेरा दिल उड़ जाएगा।
[सह़ीह़] [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।]
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नमाज़ का तरीक़ा