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बेशक आँखें मलद्वार की रस्सी हैं, जब आँखें सो जाती हैं तो रस्सी ढीली पड़ जाती है
बेशक आँखें मलद्वार की रस्सी हैं, जब आँखें सो जाती हैं तो रस्सी ढीली पड़ जाती है
मुआविया बिन अबू सुफ़यान (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: बेशक आँखें मलद्वार की रस्सी हैं, जब आँखें सो जाती हैं तो रस्सी ढीली पड़ जाती है।
[ह़सन] [इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।]
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