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अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कृत्रिम बाल जोड़ने वाली तथा जुड़वाने वाली और गोदने वाली तथा गुदवाने…
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कृत्रिम बाल जोड़ने वाली तथा जुड़वाने वाली और गोदने वाली तथा गुदवाने वाली पर लानत भेजी है।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कृत्रिम बाल जोड़ने वाली तथा जुड़वाने वाली और गोदने वाली तथा गुदवाने वाली पर लानत भेजी है।
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अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने निम्नलिखित चार प्रकार के लोगों के लिए अल्लाह की दया से धुतकारे जाने की बद-दुआ की है : 1- अपने या किसी दूसरे के बाल में किसी दूसरे का बाल जोड़ने वाली। 2- किसी से अपने बाल में किसी दूसरे का बाल जोड़ देने का आग्रह करने वाली। 3- गोदने वाली, जो शोभा तथा सुंदरता के लिए चेहरे, हथेली या सीना आदि शरीर के किसी अंग में सूई चुभाकर वहाँ सुर्मा आदि डाल देती है, ताकि वह स्थान नीला या हरा पड़ जाए। 4- किसी दूसरे से गोदने का आग्रह करने वाली। ये सारे कार्य बड़े गुनाहों के दायरे में आते हैं।فوائد الحديث
इब्न-ए-हजर कहते हैं : मना बाल में बाल जोड़ना है। बाल से बाल के सिवा कपड़ा आदि जोड़ना मना नहीं है।
किसी गुनाह के काम पर सहयोग करना हराम है।
अल्लाह की रचना में परिवर्तन की मनाही, क्योंकि यह फ़रेब एवं धोखा है।
जिन लोगों पर अल्लाह और उसके रसूल ने सामान्य तौर पर लानत भेजी हो, उनपर लानत भेजना जायज़ है।
इस हदीस की रू से आज के ज़माने का विग पहनना भी मना है। ग़ैर-मुस्लिम से मुशाबहत और धोखे के कारण यह हराम है।
ख़त्ताबी कहते हैं : इन चीज़ों के बारे में इस प्रकार की बड़ी चेतावनी इसलिए दी गई है कि इनका इस्तेमाल लोगों को धोखा एवं फ़रेब देना है। अगर इनमें से किसी चीज़ के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती, तो यह अन्य प्रकार के धोखों की अनुमति देने का सबब बनता। दूसरी बात यह है कि यह चीज़ें अल्लाह की रचना में परिवर्तन का द्योतक हैं। इसी की ओर इशारा करते हुए अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद की हदीस में कहा गया है : "अल्लाह की रचना में परिवर्तन करने वालियाँ", और अल्लाह ही अधिक जानता है।
नववी कहते हैं : गोदना और गुदवाना दोनों हराम हैं। जिस स्थान को गोदा जाए, वह नापाक हो जाता है। गोदी गई आकृतियों को इलाज से हटाना संभव हो, तो हटाना वाजिब होगा। अगर हटाने के लिए ऑपरेशन ज़रूरी हो और इससे जान जाने, किसी अंग के नष्ट या बेकार हो जाने या किसी ज़ाहिरी अंग के बहुत ज़्यादा बदनुमा हो जाने का भय हो, तो हटाना वाजिब नहीं होगा। ऐसे में, तौबा कर ली जाए, तो गुनाह नहीं रह जाता। लेकिन अगर ऊपर बताई गई बातों में से किसी बात का भय न हो, तो हटाना ज़रूरी होगा, और देरी करने की परिस्थिति में गुनाहगार होगा।
التصنيفات
वस्त्र तथा शोभा