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ग़ैब की चाबियां पांच हैं
ग़ैब की चाबियां पांच हैं
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "ग़ैब की चाबियां पांच हैं, {निःसंदेह, अल्लाह ही के पास है क़यामत का ज्ञान, वही उतारता है वर्षा और जानता है जो कुछ गर्भाशयों में है और नहीं जानता कोई प्राणी कि वह क्या कमायेगा कल और नहीं जानता कोई प्राणी कि किस धरती में मरेगा। वास्तव में, अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला, सबसे सूचित है।}"
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ग़ैब अल्लाह के पास है, उसे उसके सिवा कोई नहीं जानता। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि गैब की चाबियां और उसके खजाने पांच हैं : पहला : क़यामत कब आएगी, इसके बारे में अल्लाह के अलावा कोई नहीं जानता है। यह आख़िरत के ज्ञान की ओर एक संकेत है, क्योंकि क़यामत का दिन उसकी पहली कड़ी है। और जब निकटतम चीज़ के ज्ञान का ही खंडन हो गया, तो उसके बाद की चीज़ों का ज्ञान तो स्वतः ही खंडित हो जाता है। दूसरा : बारिश कब आएगी, यह अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। इसमें ऊपरी दुनिया के मामलों की ओर संकेत है। बारिश का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए किया गया है, क्योंकि यद्यपि इसके कुछ कारण होते हैं, जो आमतौर पर इसके होने का संकेत देते हैं, लेकिन यह संकेत निश्चित और यक़ीनी नहीं होता। तीसरा : जो कुछ गर्भाशयों में होता है; जैसे नर या मादा, काला या गोरा, पूर्ण या अपूर्ण, अभागा या भाग्यशाली इत्यादि। गर्भाशय का विशेष रूप से उल्लेख इसलिए किया गया है, क्योंकि अधिकतर लोग सामान्य अनुभव के आधार पर इसके बारे में जानते हैं। इसके बावजूद, इस बात का खंडन किया गया है कि कोई उसकी वास्तविकता को जान सकता है, तो अन्य चीज़ों का ज्ञान होना तो और भी दूर की बात है। चौथा : कल क्या होगा, यह अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। इसमें ज़माने के विभिन्न दौरों और उनमें घटने वाली घटनाओं की ओर इशारा है। यहाँ "कल" शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया है, क्योंकि वह सबसे क़रीबी ज़माना है। जब इतना क़रीब होने के बावजूद, और कुछ संकेतों और लक्षणों की संभावना के होते हुए भी, यह नहीं जाना जा सकता कि उसमें वास्तव में क्या होगा, तो जो उससे अधिक दूर है, उसके बारे में तो और भी नहीं जाना जा सकता। पाँचवाँ : कोई प्राणी नहीं जानता कि उसकी मृत्यु किस धरती पर होगी। यह निम्न लोक के मामलों की ओर एक संकेत है। यद्यपि सामान्यतः अधिकतर लोग अपने ही देश में मरते हैं, लेकिन यह कोई अटल सत्य नहीं है। बल्कि अगर वह अपने देश में मर भी जाए, तो उसे यह नहीं पता होता कि उसे उसके किस हिस्से में दफ़नाया जाएगा, भले ही वहाँ उसके पूर्वजों का क़ब्रिस्तान ही क्यों न हो। वास्तव में, अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला, सबसे सूचित है। वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, छिपी और गुप्त चीज़ों तथा सारे भेदों से पूरी तरह अवगत है। इस प्रकार इस आयत ने ग़ैब (परोक्ष) के सभी प्रकारों को एकत्र कर दिया है और सभी झूठे दावों को समाप्त कर दिया है।فوائد الحديث
गैब के उन पाँच ख़ज़ानों का वर्णन, जिन्हें अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता।
सिन्धी कहते हैं : हदीस के शब्द 'ग़ैब की चाबियाँ पाँच हैं' में इन पाँच चीज़ों को 'ग़ैब की चाबियाँ' इसलिए कहा गया है, क्योंकि जिसके पास यह पाँच चीज़ें हैं, उसके पास संपूर्ण ग़ैब है। अतः, यह मानो ऐसी चीज़ें हो गईं, जिनसे ग़ैब के खज़ाने खोले जाते हैं।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : इब्न-ए-अबू जमरा कहते हैं : सुनने वाले को बात समझाने के लिए 'कुंजियों' शब्द का प्रयोग किया है; क्योंकि हर वह चीज़, जिसके और आपके बीच कोई पर्दा हो, वह आपसे छुपी हुई होती है। और सामान्यतः उस तक पहुँचने का ज़रिया दरवाज़ा होता है। फिर जब दरवाज़ा बंद हो, तो कुंजी की आवश्यकता पड़ती है। तो जब उस कुंजी का ही पता न हो, जो ग़ैब तक पहुँचने का ज़रिया है, तो फिर उस ग़ैब को कैसे जाना जा सकता है।
इब्न-ए-अबू जमरा ने कहा है : इन्हें पाँच रखने के पीछे का रहस्य इस बात की ओर इशारा करना है कि समस्त जगत (संसार) इसी में सिमटे हुए हैं।
अल्लाह अपनी किसी हिकमत के तहत रसूलों पर ग़ैब की कुछ बातें प्रकट कर देता है।
मुनज्जिमों (ज्योतिषियों) और काहिनों (भविष्यवक्ताओं) के ग़ैब का ज्ञान जानने के झूठे दावों का खंडन, तथा यह कि जिसने भी उन चीज़ों में से किसी के ज्ञान का दावा किया, जिनका ज्ञान अल्लाह ने अपने लिए ख़ास रखा है, उसने अल्लाह, उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और महान क़ुरआन को झुठलाया।
