إعدادات العرض
तुम्हारे कमज़ोर लोगों के कारण ही तुम्हारी सहायता की जाती है और तुम्हें रोज़ी दी जाती है।
तुम्हारे कमज़ोर लोगों के कारण ही तुम्हारी सहायता की जाती है और तुम्हें रोज़ी दी जाती है।
मुस्अब बिन साद कहते हैं : साद -रज़ियल्लाहु अनहु- के मन में आया कि उन्हें अपने से कमतर लोगों पर कुछ श्रेष्ठता प्राप्त है। अतः नबी सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम्हारे कमज़ोर लोगों के कारण ही तुम्हारी सहायता की जाती है और तुम्हें रोज़ी दी जाती है।"
[स़ह़ीह़] [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है]
الترجمة
العربية বাংলা Bosanski English Español فارسی Français Indonesia Русский Tagalog Türkçe اردو 中文 Tiếng Việt ئۇيغۇرچە Hausa Kurdî Nederlands Kiswahili অসমীয়া ગુજરાતી සිංහල Magyar ქართული Română ไทย Português मराठी ភាសាខ្មែរ دری አማርኛ Македонски తెలుగు Українська ਪੰਜਾਬੀ മലയാളം Moore ಕನ್ನಡ پښتوالشرح
साद बिन अबू वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अनहु ने सोच रखा था कि चूँकि वह एक बहादुर इन्सान हैं, इसलिए उन्हें दूसरे कमज़ोर लोगों पर उत्कृष्टता प्राप्त है। अतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कह दिया : तुम्हें जो सहायता एवं रोज़ी मिलती है, वह तुम्हारे अंदर मौजूद कमज़रों लोगों की दुआओं, नमाज़ों एवं अल्लाह के प्रति निष्ठा के कारण मिलती है। क्योंकि कमजोर लोगों के हृदय संसार की चमक-दमक में उलझे नहीं होते, इसीलिए उनकी दुआओं में आम तौर पर अधिक सच्चाई और उनकी इबादतों में अधिक विनम्रता होती है।فوائد الحديث
विनम्र रहने तथा अभिमान से बचने की प्रेरणा।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : बलवान व्यक्ति जहाँ अपनी वीरता के मामले में श्रेष्ठ होता है, वहीं कमज़ोर व्यक्ति अपनी दुआ औ अल्लाह के प्रति निष्ठा के मामले में श्रेष्ठ होता है।
निर्धनों के साथ अच्छा व्यवहार करने और उन्हें उनके अधिकार देने की प्रेरणा। क्योंकि इससे अल्लाह की दया एवं सहायता मिलती है।
التصنيفات
सदाचारी बंदों के हालात