जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो।

जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो।

अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब जनाज़ा रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, तो यदि वह सदाचारी होता है तो कहता है कि मुझे ले चलो। और अगर सदाचारी नहीं होता, तो कहता है कि हाय मेरा विनाश, लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? उसकी आवाज़ इन्सान को छोड़कर हर चीज़ सुनती है। इन्सान अगर सुन ले, तो बेहोश हो जाए।"

[सह़ीह़] [इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।]

الشرح

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि जब जनाज़े को चारपाई पर रख दिया जाता है और लोग उसे अपने कंधों पर उठा लेते हैं, ऐसे में अगर वह सदाचारी होता है तो कहता है; मुझे आगे ले चलो उस नेमत की ओर जिसे वह अपने सामने देख रहा है। लेकिन अगर सदाचारी नहीं होता, तो भयानक आवाज़ में कहता है कि हाय मेरा मिनाश, ये लोग मुझे कहाँ ले जा रहे हैं? क्योंकि उसे सामने यातना दिख रही होती है। उसकी इस आवाज़ को इन्सान को छोड़ हर कोई सुनता है। उसकी आवाज़ इतनी भयानक होती है कि अगर इन्सान सुन ले, तो बेहोश हो जाए।

فوائد الحديث

सदाचारी मृतक को दफ़नाने से पहले ही सुखद चीजें दिखाई देने लगती हैं, जबकि अविश्वासी को आने वाले चरणों की भयावहता का एहसास होने लगता है और वह घबराने लगता है।

कुछ आवाज़ें ऐसी भी होती हैं, जिन्हें इन्सान को सुन नहीं सकता, लेकिन दूसरे सुन सकते हैं।

सुन्नत यह है कि जनाज़े को पुरुषों के कंधे पर उठाया जाए। महिलाओं के कंधों पर नहीं। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने महिलाओं को जनाज़े के साथ चलने से मना किया है।

التصنيفات

बर्ज़ख़ का जीवन