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''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।''
''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।''
अबू ज़र -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''ऐ अबूज़र! जब शोरबा पकाओ, तो उसमें पानी ज़्यादा डाल दो और पड़ोसियों का भी ख़्याल रख लो।''
[स़ह़ीह़] [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है]
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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अबूज़र ग़िफ़ारी रज़ियल्लाहु अनहु को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया है कि जब सब्ज़ी बनाएँ, तो उसमें अधिक पानी डालकर शोरबा अधिक बना लें और अपने पड़ोसियों का हाल मालूम करके उनको कुछ भेज दिया करें।فوائد الحديث
पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करने की प्रेरणा।
पड़ोसियों को भेंट देना मुसतहब है। क्योंकि इससे परस्पर प्रेम बढ़ता है। भेंट देने का यह आदेश उस समय और प्रबल हो जाता है, जब खाने से ख़ुशबू निकले और पड़ोसियों को उसकी जानकारी हो जाए।
अपनी हैसियत के अनुसार कम ही सही, कुछ न कुछ देने और मुसलमानों को खुश होने का अवसर प्रदान करने का महत्व।
التصنيفات
सुलह तथा पड़ोसियों से संबंधित अहकाम