إعدادات العرض
हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे और हम वयस्क होने ही वाले थे। हमने क़ुरआन सीखने से पहले ईमान सीखा और उसके…
हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे और हम वयस्क होने ही वाले थे। हमने क़ुरआन सीखने से पहले ईमान सीखा और उसके बाद क़ुरआन सीखा, तो इससे हमारा ईमान और बढ़ गया।
जुन्दुब बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं : हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे और हम वयस्क होने ही वाले थे। हमने क़ुरआन सीखने से पहले ईमान सीखा और उसके बाद क़ुरआन सीखा, तो इससे हमारा ईमान और बढ़ गया।
[स़ह़ीह़] [इसे इब्ने माजह ने रिवायत किया है]
الترجمة
العربية Português دری Македонски Tiếng Việt Magyar ქართული Indonesia বাংলা Kurdî ไทย অসমীয়া Nederlands Hausa ਪੰਜਾਬੀ Kiswahili Tagalog ភាសាខ្មែរ English ગુજરાતી සිංහල Русский मराठी മലയാളം ಕನ್ನಡ Српски Türkçe తెలుగు اردوالشرح
जुन्दुब बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ थे और उस समय हम वयस्क होने के करीब, शक्तिशाली और बलवान नौजवान थे। तो हमने क़ुरआन सीखने से पहले नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से ईमान सीखा और उसके बाद क़ुरआन सीखा, जिससे हमारा ईमान और बढ़ गया।فوائد الحديث
ईमान के बढ़ने और घटने का बयान।
बच्चों के पालन-पोषण में प्राथमिकता के आधार पर क्रमबद्ध तरीक़े से काम करना तथा उन्हें ईमान से परिपूर्ण करने का ध्यान रखना।
क़ुरआन ईमान को बढ़ाता है, दिल को रौशन करता है और सीने को खोल देता है।
