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तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी…
तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ जाए, जिस प्रकार के अज़ाब का सामना उन्हें करना पड़ा है।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं : हम लोग अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ हिज्र से गुज़रे, तो अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हम लोगों से फ़रमाया : "तुम ऐसे लोगों के घरों में रोते हुए प्रवेश करो, जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किए हैं। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना पड़ जाए, जिस प्रकार के अज़ाब का सामना उन्हें करना पड़ा है।" फिर अपनी सवारी को झिड़का, तेज़ हाँका और उसे पीछे छोड़ दिया।
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अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब समूद जाति की बस्ती से गुज़रे तो फ़रमाया कि अल्लाह के अज़ाब के शिकार होने वाले लोगों, जिनहोंने अपने ऊपर अत्याचार किए थे, की बस्ती में प्रवेश करना या जाना हो, तो रोते हुए और उनके अंत से शिक्षा ग्रहण करते हुए ही जाओ। इस डर से कि कहीं ऐसा न हो कि तुम्हें भी उसी प्रकार के अज़ाब का सामना करना न पड़े, जिस प्रकार के अज़ाब का शिकार उनको होना पड़ा था। फिर आपने अपनी सवारी को झिड़का, तेज़ भगाया और वहाँ से गुज़र गए।فوائد الحديث
जिन क़ौमों को अल्लाह ने विनष्ट कर दिया है उनके हालात पर विचार करना चाहिए, उनके करतूतों से सावधान रहना चाहिए और निशानियों पर ग़ौर करने की उपेक्षा करने से बचना चाहिए।
इन हलाक होने वाली जातियों की बस्तियों में उनके बाद निवास नहीं किया जाएगा और न ही उन्हें वतन बनया जाएगा, क्योंकि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने इन बस्तियों में रोते हुए ही प्रवेश करने का आदेश दिया है और वहाँ निवास करने वाले के लिए हमेशा रोते रहना संभव नहीं है।
नववी कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि अत्याचारी क़ौमों की बस्तियों और अज़ाब का सामना करने वाले स्थानों से गुज़रते समय इन्सान को आत्म चिंतन करना चाहिए। इसी तरह, मुहस्सिर वादी, जहाँ अबरहा की सेना हलाक हुई थी, से गुज़रते समय तेज़ चलना चाहिए। इस प्रकार के तमाम स्थानों से गुज़रते समय आत्म चिंतना करना चाहिए, डरना चाहिए, रोना चाहिए, शिक्षा ग्रहण करना चाहिए और अल्लाह की शरण माँगनी चाहिए।
इस मनाही एवं चेतावनी के दायरे में समूद बस्ती के साथ उन तमाम जातियों की बस्तियाँ शामिल हैं, जिन्हें अल्लाह के अज़ाब का सामना करना पड़ा था।
इन स्थानों को पर्यटन एवं मनोरंजन आदि के लिए उपयोग करना मना है।
التصنيفات
यात्रा के आदाब तथा अहकाम