सुन लो! दुनिया धिक्कारयोग्य है और जो कुछ उसमें है सब धिक्कारयोग्य है, सिवाय अल्लाह के ज़िक्र और उससे संबंधित…

सुन लो! दुनिया धिक्कारयोग्य है और जो कुछ उसमें है सब धिक्कारयोग्य है, सिवाय अल्लाह के ज़िक्र और उससे संबंधित वस्तुओं के तथा ज्ञानी एवं ज्ञानार्जन करने वाले व्यक्ति के।

अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "सुन लो! दुनिया धिक्कारयोग्य है और जो कुछ उसमें है सब धिक्कारयोग्य है, सिवाय अल्लाह के ज़िक्र और उससे संबंधित वस्तुओं के तथा ज्ञानी एवं ज्ञानार्जन करने वाले व्यक्ति के।"

[ह़सन] [इस ह़दीस़ को तिर्मिज़ी और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है]

الشرح

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि दुनिया और उसकी सारी चीज़ें अल्लाह के निकट घृणित, निंदित, तिरस्कारित एवं अप्रशंसित हैं। क्योंकि दुनिया और उसकी सारी चीज़ें अल्लाह के अतिरिक्त अन्य चीज़ों में व्यस्त तथा अल्लाह से दूर करने का काम करती हैं। इससे अपवाद हैं तो बस अल्लाह का ज़िक्र और उससे मिलती-जुलती अन्य चीज़ें जो अल्लाह को प्रिय हैं, शरई ज्ञान रखने वाला व्यक्ति जो उसे लोगों में बाँटने का काम करता हो या फिर शरई ज्ञान अर्जित करने वाला शख़्स।

فوائد الحديث

दुनिया पर आम अंदाज़ में लानत करना जायज़ नहीं है। कई हदीसों में इससे मना किया गया है। अलबत्ता दुनिया की उन चीज़ों पर लानत करना जायज़ है, जो अल्लाह से और उसकी बंदगी से हटाने वाली हो।

अल्लाह के ज़िक्र तथा उसमें सहायक चीज़ों को छोड़कर दुनिया की सारी चीज़ें खेल-तमाशे में दाख़िल हैं।

ज्ञान, ज्ञानवान् लोगों तथा ज्ञान अर्जित करने वालों की फ़ज़ीलत का बयान।

इब्न-ए-तैमिया कहते हैं : दुनिया की वह चीज़ें निंदनीय हैं, जो किसी अन्य कारण से हराम हों या हलाल तो हों लेकिन अधिक से अधिक एकत्र करने की लालसा या अभिमान का जज़्बा पाया जाए। जो चीज़ें अभिमान या लड़-झगड़ने के लिए एकत्र की जाएँ, वो समझदार लोगों के यहाँ घृणित हुआ करती हैं।

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संसार प्रेम की मज़म्मत