ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ।

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ।

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़रमाया करते थे : "ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ।"

[स़ह़ीह़] [इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है]

الشرح

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक दुआ यह है : «अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुकल हुदा» यानी ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सीधा रास्ता यानी सत्य की पहचान और उसपर अमल करने का सुयोग, «वत-तुक़ा» आदेशों तथा निषेधों के अनुपालन का जज़्बा, «वल-अफ़ाफ़» अवैध एवं अनुचित बातों तथा कार्यों से बचने की शक्ति, «वल-ग़िना» और सृष्टियों से निस्पृहता की दुआ करता हूँ, कि तेरे द्वार के अतिरिक्त किसी और के द्वार पर जाने की आवश्यकता न हो।

فوائد الحديث

मार्गदर्शन, धर्मपरायणता, पवित्रता और निस्वार्थता की फ़ज़ीलत, और उनसे सुशोभित होने के लिए प्रोत्साहन।

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि अपने लिए किसी लाभ एवं हानि के मालिक नहीं थे। लाभ एवं हानि का मालिक बस अल्लाह है।

लाभ, हानि तथा मार्गदर्शन का मालिक बस अल्लाह है। न कोई निकटवर्ती फ़रिश्ता, न अल्लाह का भेजा हुआ कोई रसूल।

التصنيفات

मासूर दुआएँ