إعدادات العرض
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो…
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।
उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।"
[स़ह़ीह़] [इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है]
الترجمة
العربية বাংলা Bosanski English Español فارسی Français Indonesia Русский Tagalog Türkçe اردو 中文 සිංහල ئۇيغۇرچە Hausa Kurdî Kiswahili Português Nederlands Tiếng Việt অসমীয়া ગુજરાતી پښتو മലയാളം नेपाली ქართული Magyar తెలుగు Македонски Svenska ಕನ್ನಡ Moore Română Українська ไทย मराठी ਪੰਜਾਬੀ دری አማርኛ Wolof ភាសាខ្មែរ Malagasy Yorùbá Српски Lietuvių Kinyarwanda Shqipالشرح
उक़बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अनहु ने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा कि वह कौन-कौन सी चीज़ें हैैं, जो एक मोमिन के लिए दुनिया एवं आख़िरत में मुक्ति का सबब बनती हैं? चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनसे कहा कि तीन बातों का ख़्याल रखा करो : 1- सभी प्रकार की बुरी एवं व्यर्थ बातों से अपनी ज़बान की रक्षा करो और केवल अच्छी बातों के लिए ही मुँह खोला करो। 2- अपने घर में रहा करो ताकि तनहाई में अल्लाह की इबादत कर सको, उसकी बंदगी में लगे रहो और फ़ितनों से अलग रहा करो। 3- अपने गुनाहों पर रोया करो, शर्मिंदा रहो और अल्लाह के सामने तौबा करो।فوائد الحديث
सहाबा की भरपूर कोशिश रहा करती थी कि मुक्ति के रास्ते जान सकें।
दुनिया व आख़िरत में मुक्ति दिलाने वाली चीज़ों का बयान।
जब दूसरे का भला करना संभव न हो या लोगों से मेल-जोल रखने की अवस्था में अपने दीन एवं खुद का नुक़सान होने का भय हो तो इन्सान को स्वयं को अपने आप तक सीमित कर लेना चाहिए।
घर को लाज़िम पकड़ने की ओर इशारा, खासकर फ़ितने के समय, क्योंकि यह धर्म को बचाने का एक तरीका है।
