إعدادات العرض
उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है।
उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है।
तथा अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है।" सही मुस्लिम के शब्द हैं : "उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद किया जाता है और उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद नहीं किया जाता, जीवित और मृत जैसी है।"
الترجمة
العربية বাংলা Bosanski English Español فارسی Français Indonesia Русский Tagalog Türkçe اردو 中文 ئۇيغۇرچە Hausa Kurdî Kiswahili Português සිංහල Nederlands Tiếng Việt অসমীয়া ગુજરાતી پښتو മലയാളം नेपाली Magyar ქართული తెలుగు Македонски Svenska Moore Română Українська ไทย मराठी ਪੰਜਾਬੀ دری አማርኛ Wolof ភាសាខ្មែរ ಕನ್ನಡ Yorùbá Српски Malagasy Kinyarwanda Shqipالشرح
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने यहाँ अल्लाह का ज़िक्र करने वाले और न करने वाले का अंतर बयान फ़रमाया है। लाभ एवं सौंदर्य के मामले में दोनों के बीच में वही अंतर है, जो जीवित एवं मृत के बीच है। जो अपने रब को याद करता है, वह एक जीवित प्राणी की तरह है, जिसका बाहरी रूप जीवन से सुसज्जित और जिसका आंतरिक रूप ज्ञान के प्रकाश से सुसज्जित है, उसके अंदर लाभ प्रदान करने की क्षमता होती है। जबकि जो अल्लाह को याद नहीं करता, उसकी मिसाल एक मृत प्राणी की तरह है, जिसका बाहरी रूप जीवन से रहित है और जिसका आंतरिक रूप बेकार है, उसके अंदर लाभ देने की क्षमता नहीं होती। इसी तरह जब घर में रहने वाले लोग अल्लाह का ज़िक्र करते हैं, तो वह घर जीवित है और जब अल्लाह के ज़िक्र की अनदेखी करते हैं, तो वह घर मृत है। वैसे, यहाँ जीवित एवं मृत यद्यपि घर के लोगों को कहा गया है, लेकिन मुराद घर में रहने वाले लोग हैं।فوائد الحديث
अल्लाह के ज़िक्र की प्रेरणा और ज़िक्र से ग़फ़लत पर चेतावनी।
जिस प्रकार आत्मा शरीर का जीवन है, उसी प्रकार ज़िक्र आत्मा का जीवन है।
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपनी बात समझाने के लिए उदाहरण दिया करते थे।
नववी कहते हैं : इस हदीस से मालूम होता है कि घर में अल्लाह का ज़िक्र करते रहना चाहिए और घर को अल्लाह के ज़िक्र से ख़ाली नहीं होने देना चाहिए।
नववी कहते हैं : अगरचे एक मृत मोमिन भी भलाई की ओर जा चुका होता है, लेकिन अल्लाह की बंदगी के सुयोग के साथ लंबी उम्र मिलना फ़ज़ीलत की बात है। क्योंकि जीवित व्यक्ति की नेकियों का ख़ज़ाना उसके द्वारा किए जा रहे अच्छे कामों से समृद्ध होता जाता है।
