मेरे सामने जन्नत एवं जहन्नम को पेश किया गया, तो मैं ने भलाई एवं बुराई के मामले में आज के जैसा दिन नहीं देखा। अगर तुम…

मेरे सामने जन्नत एवं जहन्नम को पेश किया गया, तो मैं ने भलाई एवं बुराई के मामले में आज के जैसा दिन नहीं देखा। अगर तुम वह बातें जान लो, जो मैं जानता हूँ तो अवश्य हँसना कम कर दो और अधिक रोने लगो।

अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को अपने साथियों के बारे में कोई बात पहुँची, तो आप ने भाषण दिया और इस दौरान फ़रमाया : "मेरे सामने जन्नत एवं जहन्नम को पेश किया गया, तो मैं ने भलाई एवं बुराई के मामले में आज के जैसा दिन नहीं देखा। अगर तुम वह बातें जान लो, जो मैं जानता हूँ तो अवश्य हँसना कम कर दो और अधिक रोने लगो।" वर्णनकर्ता कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथियों के सामने उससे ज़्यादा कठिन दिन कभी नहीं आया। वह कहते हैं : वे अपने सरों को छिपाकर फूट-फूटकर रोने लगे। वर्णनकर्ता कहते हैं : यह देख उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- खड़े हुए और कहने लगे : हम अल्लाह को अपना पालनहार मानकर, इस्लाम को अपना दीन मानकर और मुहम्मद को अपना नबी मानकर संतुष्ट हैं। वर्णनकर्ता कहता है : इसके बाद वह व्यक्ति खड़ा हुआ और पूछा : मेरा पिता कौन है? आपने उत्तर दिया : "तेरा पिता अमुक है।" इस परिप्रेक्ष्य में यह आयत उतरी : (ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! उन वस्तुओं के बारे में जिज्ञासा न करो जो यदि तुम्हारे सामने स्पष्ट कर दी जाएँ तो तुम्हें बुरी लगने लगें।) [सूरा माइदा : 101]

[स़ह़ीह़] [इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है]

الشرح

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपने साथियों के बारे में एक बात पहुँची। बात यह थी कि उन्होंने आपसे बहुत ज़्यादा माँगा। अतः आप क्रोधित हुए और वक्तव्य दिया तथा फ़रमाया : मेरे सामने जन्नत एवं जहन्नम को लाया गया, तो मैंने जन्नत में आज से अधिक भलाई नहीं देखी तथा जहन्नम में आज से अधिक बुराई नहीं देखी। मैंने जो कुछ देखा है, अगर तुम देख लो, और आज तथा इससे पहले देखी हुई चीज़ों में से मैं जो कुछ जानता हूँ अगर तुम जान लो, तो तुम बहुत ज़्यादा डर जाओ, तुम्हारा हँसना कम हो जाए और रोना ज़्यादा हो जाए। अनस रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : अतः उमर रज़ियल्लाहु अनहु खड़े हुए और कहने लगे : "हम इस बात से संतुष्ट हैं कि अल्लाह हमारा पालनहार है, इस्लाम हमारा दीन है तथा मुहम्मद हमारे नबी हैं।" "ऐ ईमान वालो! ऐसी बहुत-सी चीज़ों के विषय में प्रश्न न करो, जो यदि तुम्हें बता दी जायें, तो तुम्हें बुरा लग जाए।" [सूरा माइदा : 10]

فوائد الحديث

रोते समय चेहरा ढाँपना मुसतहब है।

उपदेश तथा शिक्षा देते समय क्रोधित होना जायज़ है।

التصنيفات

जन्नत तथा जहन्नम की विशेषताएँ