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सुन लो! शराब हराम कर दी गई है।
सुन लो! शराब हराम कर दी गई है।
अनस रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : मैं अबू तलहा के घर में लोगों को शराब पिला रहा था और उन दिनों उनकी शराब फ़ज़ीख़ नामी शराब हुआ करती थी, कि इसी बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक व्यक्ति को यह आवाज़ लगाने का आदेश दिया : सुन लो! शराब हराम कर दी गई है। उनका कहना है कि (यह आवाज़ सुनते ही) अबू तलहा ने मुझसे कहा : बाहर जाओ और इसे बहा दो। चुनांचे मैं बाहर गया और उसे बहा दिया। देखते ही देखते मदीने की गलियों से शराब बहने लगी। ऐसे में किसी ने कहा : कुछ लोग क़त्ल कर दिए गए और उनके पेट में शराब मौजूद थी। चुनांचे अल्लाह ने यह आयत उतारी : (ईमान लाने और अच्छे अमल करने वालों पर उन चीज़ों का कोई गुनाह नहीं है, जो वे खा चुके।) [अल-माइदा : 93]
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अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु बता रहे हैं कि वह अपनी माता के पति अबू तलहा के घर में उपस्थित लोगों को शराब पिला रहे थे और उस दिन लोग पकी हुई एवं अधपकी खजूरों से बनी शराब पी रहे थे कि इसी बीच अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ओर से भेजे हुए एक व्यक्ति ने ऐलान कर दिया : सुन लो! शराब हराम कर दी गई है, उनका कहना है कि ऐलान सुनने के बाद अबू तलहा ने मुझसे कहा : बाहर जाओ और शराब को बहा दो। चुनांचे मैं बाहर गया और उसे बहा दिया। फिर देखते ही देखते मदीने की गलियों में शराब बहने लगी। ऐसे में किसी ने कहा : कुछ सहाबा शराब हराम होने से पहले इस अवस्था में मार दिए गए कि उनके पेट में शराब मौजूद थी। चुनांचे अल्लाह ने यह आयत उतारी : {ईमान लाने और अच्छे अमल करने वालों पर उन चीज़ों का कोई गुनाह नहीं है, जो वे खा चुके।} [अल-माइदा : 93] यानी ईमान वालों ने शराब का निषेध उतरने से पहले जो कुछ खाया और पिया, उन्हें उसका गुनाह नहीं होगा।فوائد الحديث
अबू तलहा और सहाबा रज़ियल्लाहु अनहुम की यह खूबी है कि उन्होंने बिना किसी संकोच के अल्लाह के आदेश को तुरंत मान लिया। यही एक सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है।
ख़म्र : एक सारगर्भित शब्द जिसके दायरे में सारे नशीले पदार्थ आ जाते हैं।
फ़ज़ीख़ : पकी एवं अधपकी खजूरों से आग में पकाए बिना बनने वाली शराब। बुस्र : अधपकी खजूर।
इब्न-ए-हजर कहते हैं : मुहल्लब ने कहा है : शराब को रास्ते में इसलिए बहा दिया गया, ताकि उसे ठुकरा देने और छोड़ देने की बात हर तरफ़ फैल जाए। वैसे, सड़क पर शराब डालने से लोगों को कष्ट हो सकता है, लेकिन ऊपर बताई गई मसलहत इस कष्ट से कहीं अधिक महत्वूर्ण है।
बंदों पर अल्लाह के अनुग्रह का बयान और यह कि आदेश उतरने से पहले किए गए किसी कार्य की पकड़ नहीं होगी।
अल्लाह ने शराब को इसलिए हराम कर दिया है कि इससे विवेक एवं धन को होने वाली क्षति के कारण कई बुराइयाँ सामने आती हैं और विवेक छिन जाने के कारण इन्सान शराब पीकर बहुत-से गुनाह के काम करने लगता है।
