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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह - الصفحة 11
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह - الصفحة 11
20- मुआहिद (ऐसा ग़ैरमुस्लिम जिसे सुरक्षा का वचन दिया गया हो) की दियत एक आजाद व्यक्ति की दियत की आधी है।
67- जिसने हमपर हथियार उठाया, वह हममें से नहीं है।
68- चोर का हाथ एक चौथाई दीनार या उससे अधिक में काटा जाएगा।
69- अल्लाह की सीमाओं के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी और अपराध पर किसी को दस कोड़ों से अधिक नहीं लगाया जाएगा।
72- वापस जाकर फिर से नमाज़ पढ़ो, क्योंकि तुमने नमाज़ पढ़ी ही नहीं।
77- लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।
81- तुम लोग सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है।
82- रमज़ान से एक या दो दिन पहले रोज़े न रखो। परन्तु जो व्यक्ति (पहले से) रोज़े रख रहा हो, वह रख सकता है।
84- किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।
88- शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।
94- यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया।
99- तब तुम मुझे गवाह मत बनाओ। क्योंकि मैं किसी अन्याय का गवाह नहीं बनता।
