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इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
1- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
2- आपका क्या ख़याल है कि अगर मैं फ़र्ज़ नमाज़ें पढ़ूँ, रमज़ान के रोज़े रखूँ और हलाल को हलाल जानूँ
5- खाने की मौजूदगी में नमाज़ न पढ़ी जाए और न उस समय जब इन्सान को पेशाब-पाखाना की हाजत सख़्त हो।
8- मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ।
10- ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
12- जब तुममें से किसी का वज़ू टूट जाए, तो जब तक वज़ू न कर ले, अल्लाह उसकी नमाज़ ग्रहण नहीं करता।
13- मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है।
17- मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं।
18- जिसने सुबह की नमाज़ पढ़ी, वह अल्लाह की रक्षा में होता है
20- अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा।
23- जिसने अस्र की नमाज़ छोड़ दी, उसके सभी कर्म व्यर्थ हो गए।
26- “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
28- मुझे शरीर के सात अंगों पर सजदा करने का हुक्म दिया गया है
30- ऐ अल्लाह! तू ही शांति वाला है और तेरी ओर से ही शांति है। तू बरकत वाला है ऐ महानता और सम्मान वाले
35- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
38- एड़ियों के लिए आग की यातना है। पूर्ण रूप से वज़ू किया करो।
41- आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।
42- वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।
45- जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है।
46- जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है।
47- इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।
49- अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।
51- मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं
65- जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।
77- उन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तरह वज़ू करके दिखाया
98- जिस बंदे के क़दम अल्लाह के रास्ते में धूल धूसरित हो गए, उसे (जहन्नम की) आग नहीं छूएगी।
100- जिसने दो ठंडे समय की नमाज़ें पढ़ीं, वह जन्नत में जाएगा।
