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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
2- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
3- “संदेह में डालने वाली चीज़ों को छोड़कर संदेह में न डालने वाली चीज़ों को अपनाओ।
4- “अल्लाह ने हर चीज़ में अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है।
5- आपका क्या ख़याल है कि अगर मैं फ़र्ज़ नमाज़ें पढ़ूँ, रमज़ान के रोज़े रखूँ और हलाल को हलाल जानूँ
7- “न हानि स्वीकार्य है, न किसी की हानि करना उचित है।”
11- खाने की मौजूदगी में नमाज़ न पढ़ी जाए और न उस समय जब इन्सान को पेशाब-पाखाना की हाजत सख़्त हो।
14- मूँछें कतरवाओ और दाढ़ी बढ़ाओ।
16- ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
18- जब तुममें से किसी का वज़ू टूट जाए, तो जब तक वज़ू न कर ले, अल्लाह उसकी नमाज़ ग्रहण नहीं करता।
19- मिसवाक (दातून) मुँह को साफ़ करने वाली और अल्लाह को प्रसन्न करने वाली वस्तु है।
25- निस्संदेह, हलाल स्पष्ट है और हराम भी स्पष्ट है
26- अल्लाह ने हर चीज़ के साथ अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है
31- मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं।
32- जिसने सुबह की नमाज़ पढ़ी, वह अल्लाह की रक्षा में होता है
35- दुनिया एक क्षणिक उपभोग की वस्तु है और उसकी सर्वश्रेठ वस्तु नेक स्त्री है।
36- अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा।
40- जिसने अस्र की नमाज़ छोड़ दी, उसके सभी कर्म व्यर्थ हो गए।
45- “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
47- मुझे शरीर के सात अंगों पर सजदा करने का हुक्म दिया गया है
49- ऐ अल्लाह! तू ही शांति वाला है और तेरी ओर से ही शांति है। तू बरकत वाला है ऐ महानता और सम्मान वाले
53- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ख़ुतबा-ए-हाजत इस तरह सिखाया
54- वली (अभिभावक) के बिना निकाह (शादी) नहीं है।
57- इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है
60- एड़ियों के लिए आग की यातना है। पूर्ण रूप से वज़ू किया करो।
63- आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।
64- वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।
70- क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।
71- जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है।
73- जब तुम अज़ान सुनो, तो तुम उसके समान कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है।
74- इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।
76- अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।
79- मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं
94- जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।
